कुपोषित बच्चों को घर जाकर खाना खिला रहीं हैं कार्यकर्ता, प्रयासों से कम हुआ कुपोषण

इंदौर। कुपोषण कम करने के लिए अफसर प्रयोग कर रहे हैं। जो कुपोषित बच्चे आंगनवाड़ी के समय में भोजन करने केंद्र नहीं आते हैं, कार्यकर्ता उनके घर जाकर उन्हें खाना खिला रही हैं। शाम को भी बच्चों के घर जाकर देखती हैं कि मां ने खाने को दिया या नहीं। नतीजतन मूसाखेड़ी-खजराना क्षेत्र में छह माह में कुपोषण आधा हो गया है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना क्रमांक 5 में मूसाखेड़ी, खजराना, पीपल्याहाना रिंग रोड, सिद्धि विनायक क्षेत्र की आंगनवाड़ी केंद्रों में छह माह से स्वप्रेरणा योजना चलाई जा रही है। इसके तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को सिर्फ सरकारी फरमान का पालन करने के बजाय कुपोषण दूर करने के लिए खुद पहल करना है। परियोजना क्र. 5 की आंगनवाड़ी केंद्रों को इसके लिए चुना गया। यहां छह महीने पहले 1479 कुपोषित और 108 अतिकुपोषित बच्चे थे। फिलहाल यह संख्या घटकर क्रमशः 829 और 67 हो गई है।

कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि कोई भी कुपोषित बच्चा एक दिन भी भोजन से वंचित नहीं रहेगा। इसके चलते पोषण आहार और टेक होम राशन सहित कुपोषित बच्चों को दूध-केला आदि देने के लिए कार्यकर्ता घर जाती है। बच्चे की मां से लगातार संपर्क में रहती है, ताकि देखरेख के बारे में लगातार पता चल सके। बच्चे का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाने की जिम्मेदारी भी कार्यकर्ता की होती है।

सभी में शुरू होगा प्रयोग

संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास राजेश मेहरा ने बताया कि कनाड़िया में स्वप्रेरणा से कार्यकर्ता ने बहुत अच्छे नतीजे दिए थे। इसी तर्ज पर परियोजना क्र. 5 में काम शुरू किया। हम लगातार निगरानी रख रहे हैं। कार्यकर्ता से सीधा संपर्क है। कहीं भी गड़बड़ी लगने पर तुरंत दुरुस्त किया जा रहा है। एक परियोजना में अच्छी सफलता मिली है। इस प्रयोग को अन्य परियोजनाओं में भी लागू किया जा रहा है। खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में इसकी बहुत जरूरत है।

प्रयोग के नतीजे

क्षेत्र प्रकार छह माह पूर्व अब

खजराना कम वजन के बच्चे 282 150

मूसाखेड़ी कम वजन के बच्चे 421 144

पीपल्याहाना कम वजन के बच्चे 414 300

सिद्धि विनायक कम वजन के बच्चे 362 235

खजराना अति कम वजन 12 08

मूसाखेड़ी अति कम वजन 23 13

पीपल्याहाना अति कम वजन 33 23

सिद्धि विनायक अति कम वजन 40 23

कब तक जारी रहेगा अभियान

अब सवाल यह उठता है कि क्या अफसर लगातार केंद्रों का निरीक्षण कर बच्चों की स्थिति में सुधार नहीं ला सकते हैं। एक परियोजना में छह महीने प्रयोग करने से स्थिति में बदलाव आया है। अब यह सुधार कितने दिन तक जारी रहेगा। जानकारों के मुताबिक अगर बच्चों की तरफ सतत ध्यान नहीं दिया गया तो वे फिर से कुपोषित श्रेणी में आ सकते हैं। फिलहाल विभाग के पास इस संबंध में कोई भी स्थायी योजना नहीं है। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में अफसरों को गए वर्षों हो जाते हैं। वहां सबसे ज्यादा कुपोषण मिटाने की जरूरत है।naidunia

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