ट्रेन में बासा खाना परोसने की व्यवस्था में रेलवे नहीं कर पा रहा सुधार

जबलपुर। रेलवे की तमाम सुविधाओं में सुधार हो रहा है, लेकिन पेंट्रीकार में मिलने वाले खाने में अब तक कोई सुधार नहीं हो सका है। पैसे खर्च करने के बाद भी पैसेंजर को क्वालिटी वाला भोजन नहीं मिल पा रहा है। ट्रेन में पेंट्रीकार को लाइसेंस देने से लेकर संचालन करने तक की जिम्मेदारी रेलवे ने देशभर के रेल जोन से लेकर आईआरसीटीसी को दे दी है। इसके बाद भी खाने की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं आया है। वहीं ई कैटरिंग सुविधा की हकीकत यह है कि अधिकांश पैसेंजर को यह तक पता नहीं है कि ई कैटरिंग से ट्रेन में खाना कैसे मांगवाते हैं।

खाने की शिकायत सबसे ज्यादा मिलती है

रेलवे के पास सबसे अधिक शिकायत खाने को लेकर आती है। ट्वीट से लेकर रेलवे हेल्पलाइन नंबर पर आने वाली 100 शिकायतों में तकरीबन 30 से 35 शिकायत खाने की होती हैं। यही वजह है कि रेलवे ने रेलवे मंडल से पेंट्रीकार चलाने की जिम्मेदारी लेकर आईआरसीटीसी को दे दी, लेकिन इसके बाद भी क्वालिटी में सुधार नहीं हुआ है।

हर जगह देना होता है पैसा

पेंट्रीकार के एक मैनेजर के मुताबिक पेंट्रीकार का टेंडर लेने से लेकर इसकी लाइसेंस फीस सबसे अधिक होती है। इसके बाद जिस रूट से ट्रेन गुजरती है उसमें आने वाले स्टेशन से जुड़े रेलवे के कमर्शियल इंस्पेक्टर, फूड इंस्पेक्टर, आरपीएफ से जुड़े कर्मचारियों को भी पैसा देना होता है। इन सब के बाद पेंट्रीकार का टेंडर लेने वाले व्यक्ति को पैसेंजर तक पहुंचने वाली थाली उसे ही 40 से 55 रुपए में पड़ती है, तो वह इसे 100 से 160 रुपए तक बेचता है। इस सिस्टम में सुधार होने पर ही खाने की क्वालिटी सुधर सकती है।

पेंट्रीकार में खाना बनने से लेकर परोसने तक की हकीकत

– पटना से मुम्बई के बीच चलने वाली ट्रेन अपना सफर तीन दिन में पूरा करती है।

– पहले दिन ही पेंट्रीकार में खाना, सब्जियां, पनीर, अंडे, पनीर, चिकन लोड होते हैं।

– दूसरे दिन यह सब बासा हो जाता है, फिर भी इससे खाना बनता है।

– स्पेशल खाने में सिर्फ पनीर के चार टुकड़े या फिर चिकन का एक टुकड़ा देते हैं।

– इसमें दोनों ही बसा होता है, लेकिन इसकी जांच नहीं होती।

– बीच में मटेरियल कम पड़ने पर सब्जियां या फिर चिकन रास्ते से लिया जाता है।

पेंट्रीकार खत्म कर स्टेशन में खाना देने का भेजा सुझाव

पश्चिम मध्य रेलवे के चीफ ऑपरेटिंग मैनेजर मनोज सेठ ने रेलवे जोन को एक सुझाव भेजा है। सुझाव में कहा गया है कि…

– ट्रेनों में से सभी पेंट्रीकार को बंद कर दिया जाए।

– हर ट्रेन के लिए रूट के मुताबिक एक स्पेशल स्टेशन चिन्हित हों, जहां खाना खाने के समय ट्रेन रुके।

– प्लेटफार्म में हर कोच के सामने एक स्टॉल हो जिसमें हर तरह का खाना हो।

– खाने की गुणवत्ता परखने की जिम्मेदारी उस स्टेशन के फूड इंस्पेक्टर की हो।

– ट्रेन का स्टॉप 20 से 30 मिनट का रखा जाए ताकि खाने के लिए पर्याप्त समय मिले।

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