डायबिटीज है तो क्या हुआ, फल बिल्कुल न छोड़ें : अध्ययन

डायबिटीज होने के बाद लोग चीनी खाना तो छोड़ते ही हैं, साथ ही फल लेना भी बंद कर देते हैं। इससे उनके शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। आहार विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज रोगी फल जरूर खाएं, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। फल की सही मात्रा उन्हें फायदा पहुंचाएगी।

डायबिटीज है तो क्या हुआ, फल बिल्कुल न छोड़ें : अध्ययन

फ्रक्टोज शहद, फल, सब्जी और गन्ने में मौजूद एक तरह की शक्कर होती है, जो शरीर को ऊर्जा देती है। चीनी के अन्य रूपों में सुक्रोज के साथ-साथ ग्लूकोज (डेक्सट्रोज) और गैलेक्टोज शामिल है। कुछ फलों में उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी हो सकता है, खासतौर पर केला, चीकू, आम, सेब और तरबूज में।

पोषण विशेषज्ञ और फिजियोलॉजिस्ट रितेश बावरी कहते हैं, ‘फ्रक्टोज का असर चीनी से अलग होता है। फ्रूटोज ग्लूकोज की तुलना में धीमी गति से अवशोषित होता है। इसे कोशिका में प्रवेश करने के लिए इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती है। इसकी वजह है कि यह तेजी से फ्रक्टोज-1 फॉस्फेट में टूट जाता है।’

बावरी यह भी कहते हैं, ‘मधुमेह रोगियों को पूरी तरह से फ्रक्टोज नहीं छोड़ना चाहिए। यह मधुमेह के लिए सुरक्षित है।’ पोषण विशेषज्ञ और खाद्य सलाहकार ने कहा, ‘रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित या अनियंत्रित करने के आधार पर डॉक्टर कुछ निश्चित फ्रक्टोज सेवन की सिफारिश करते हैं।

टाइप 2 डायबिटीज के रोगी अपने इंसुलिन के स्तर को कम करने के लिए फ्रक्टोज का उपयोग कर सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उन्हें कार्बोहाइड्रेट की आहार संबंधी जरूरतें मिलें।’ पेस्वानी ने यह भी कहा, ‘अगर फ्रक्टोज ज्यादा लेंगे तो यह रक्त ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाएगा और रक्तचाप में वृद्धि कर देगा, जो रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि का एक लक्षण है। इसकी ज्यादा मात्रा विशेष रूप से पुरुषों में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकता है।

source: livehindustan

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