शरीर के लिए नुकसानदेह है अंडे का सफेद हिस्सा, जान लीजिए ये कारण

नई दिल्ली: ब्रेकफास्ट में अंडा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. अंडे को चाहे आप उबाल कर खाएं, या फिर ऑमलेट बनाकर. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंडे की सफेदी का सेवन आपकी बॉडी पर कई तरह के दुष्प्रभाव डालता हैं. जिससे आपकी बॉडी को नुकसान पंहुचता हैं. इसके सेवन से शरीर में कई अन्य तरह की एलर्जी और समस्याएं भी हो जाती है. यह फैट फ्री और लो कैलोरी वाला होते हुए भी सेहत के लिए हैं नुकसानदेह,

1. बढ़ सकती है एलर्जी
कुछ लोगों को अंडे के सफेद भाग से एलर्जी होती हैं. लेकिन इसका पता लगाना आसान नहीं हैं, इसके लक्ष्ण शरीर पर चकत्ते बनना, त्वचा में सूजन और लाल होना, ऐंठन, दस्त, खुजली और आंखों में पानी भरना आदि हैं, जिससे अंडे से हुई एलर्जी का पता लगाया जा सकता है. अंडे की सफेदी से लोगों को  सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, रक्तचाप में गिरावट आ जाती है और बेहोशी जैसा महसूस होने लगता है.

2. हो सकता है मांसपेशियों में दर्द
अंडे का सफेद हिस्सा खाने से बायोटिन की कमी हो जाती हैं. बायोटिन की कमी को विटामिन B7 और विटामिन H भी कहते हैं. अंडे के सफेद भाग में मौजूद एब्यूमिन के सेवन से शरीर को बायोटिन अवशोषित करने में परेशानी होती है.
जिसके कारण त्वचा संबंधित समस्याएं होती हैं, जिससे बच्चों की त्वचा पर रैशेज और व्यस्कों में सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस की समस्या होती हैं. इससे मांसपेशियों में दर्द, बालों का झड़ना जैसी परेशानियां भी होने लगती हैं. अंडे के सफेद भाग में मौजूद एब्यूमिन का अत्यधिक सेवन करने से शरीर को बायोटिन अवशोषित करने में परेशानी होती है.

3. किडनी के लिए हानिकारक
अंडे के सफेद भाग में प्रोटीन की अत्यधिक मात्रा होती हैं, जिस कारण किडनी की समस्या से ग्रसित व्यक्ति के लिए हानिकारक होता हैं. क्योंकि किडनी की समस्या के कारण लोगों में ग्लोमेरूलर फिल्टरेशन रेट (जीएफआर) की मात्रा कम होती है. जीएफआर एक तरह से तरल पदार्थ की प्रवाह दर होती है जो किडनी को फिल्टर करती हैं. पर अंडे के सफेद भाग में मौजूद प्रोटीन जीएफआर की मात्रा कम कर देता हैं.

4. साल्मोनेला बैक्टीरिया से दूषित
अंडे का सफेद भाग साल्मोनेला से दूषित भी हो सकता हैं. साल्मोनेला एक ऐसा बैक्टीरिया है जो कि मुर्गियों की आंतों में पाया जाता है. यह अंडे के बाहरी आवरण और उसके अंदर भी पाये जाते हैं। साल्मोनेला को खत्म करने के लिए इन्हें ज्यादा देर तक और ज्यादा तापमान पर पकायें। अंडे के ऊपरी हिस्से और कम उबले हुये अंडों में भी बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं.

 

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