हाथ-पैर की नसों का ब्लाॅकेज खोलने के लिए एम्स में लगेगी मशीन

भोपाल। ऑल इंडिया इस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) भोपाल में अगले महीने से हाथ-पैर व अन्य अंगों में नसों का ब्लाॅकेज खोलने की सुविधा शुरू हो जाएगी। इसके लिए यहां पर डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) मशीन लगाई जा रही है। मशीन आ चुकी है। इंस्टालेशन की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सिर्फ बीएमएएचआरसी में यह सुविधा हैै, लेकिन यहां पर मशीन चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं हैं। निजी अस्पतालों में भी बहुत कम जगह पर यह सुविधा उपलब्ध है।

जिस तरह हार्ट की नसों में ब्लाॅकेज आ जाता है। उसी तरह से हाथ-पैर व अन्य जगह पर भी नसों में ब्लाकेज होता है। इन ब्लाकेज को खोलने के लिए डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी मशीन एम्स भोपाल में लगाई जा रही है। एम्स के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि डीएसए मशीन आ चुकी है।

इंस्टालेशन की प्रक्रिया चल रही है। करीब हफ्ते भर ट्रायल के बाद इसी महीने जांच की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। डॉक्टरों के मुताबिक डायबिटीज, ट्रामा (चोट), मोटापा समेत अन्य कारणों से खून की नसों में ब्लाकेज आ जाता है।

कई बार नसों में खून का थक्का जम जाने से ब्लाकेज हो जाता है। जिससे संबंधित अंग में सूजन आ जाती है। यह थक्का टूटकर हार्ट तक पहुंच जाता है जो जानलेवा होता है। डीएसए मशीन से यह ब्लाकेज हटाया जाता है। ब्लाकेज हटाने में अधिकतम एक घंटे लगते हैं। निजी अस्पतालों में डीएसए मशीन से एंजियोग्राफी का खर्च करीब 10 से 15 हजार रुपए है। एम्स भोपाल में दिल्ली की तर्ज पर 2 से 3 हजार रुपए में यह जांच व ब्लाकेज खोलने की का काम हो जाएगा।

मेमोग्राफी की सुविधा भी इसी महीने से

एम्स में स्तन कैंसर की जांच के लिए मेमोग्राफी की सुविधा भी इसे महीने से शुरू की जा रही है। मेमोग्राफी मशीन आ चुकी है। इंस्टालेशन की प्रक्रिया चल रही है। भोपाल में मेमोग्राफी जांच की सुविधा न तो हमीदिया में है और न ही जेपी अस्पताल में। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में जांच कराना होती है। इस पर करीब दो हजार रुपए का खर्च है। करीब आधे घंटे के भीतर यह जांच हो जाती है। स्तन कैंसर की जांच का यह सबसे आसान तरीका है।

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