51 में से 36 जिला अस्पतालों में नहीं है पैथालॉजिस्ट, कैसे होगी कैंसर मरीज की पहचान

इंदौर। प्रदेश के हर जिला अस्पताल में एक डॉक्टर (नोडल अधिकारी) और दो नर्स कैंसर के इलाज के लिए प्रशिक्षित हो चुके हैं। एमपी कैंसर केयर मॉडल लागू होने के बावजूद मप्र के मरीजों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि 51 जिलों में से लगभग 36 में पैथालॉजिस्ट ही नहीं हैं।

मप्र के अलावा उड़ीसा, राजस्थान, हिमाचल और उत्तरप्रदेश में इस मॉडल को लागू करने वाले कैंसर विशेषज्ञ डॉ. दिनेश पेंढारकर भी मानते हैं कि पैथालॉजिस्ट के अभाव में नए मरीजों का पता लगाना मुश्किल है। गत दिवस उज्जैन दौरे पर पहुंचीं स्वास्थ्य विभाग की आयुक्त पल्लवी जैन के सामने भी यह मुद्दा उठा।

प्रदेश में वर्तमान में लगभग 93,754 कैंसर मरीज हैं। इसमें से 18,693 सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। हर साल एक लाख आबादी पर 40 से 120 नए मरीज सामने आ रहे हैं। इन नए मरीजों की पहचान के लिए पैथालॉजिस्ट की आवश्यकता है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा में मेडिकल कॉलेज होने से मरीजों को सुविधाएं मिल जाती हैं। इसके अलावा 10 जिलों में व्यवस्थाएं हैं। शेष 36 जिलों में से भी अशोकनगर, राजगढ़, सिंगरौली, नरसिंहपुर, रायसेन, डिंडौरी, अनूपपुर, पन्ना, आगर-मालवा और बुरहानपुर में स्थिति बदतर है।

जांच के लिए अधिकृत करेगी सरकार

पैथालॉजिस्ट की कमी को पूरा करने के लिए सरकार जिला स्तर पर ही पैथालॉजी लैब को जांच के लिए अधिकृत करेगी। लैब का चयन टेंडर के आधार पर किया जाएगा। इसका खर्च सरकार वहन करेगी। शुक्रवार को आयुक्त पल्लवी जैन से इसे लागू किए जाने पर विस्तृत चर्चा हुई। संभवत: छह माह के भीतर इसे लागू कर दिया जाएगा

– डॉ. सीएम त्रिपाठी, स्टेट कैंसर नोडल अधिकारी, एमपी कैंसर केयर मॉडल

क्या है एमपी कैंसर केयर मॉडल

यह मॉडल 2014 में शुरू किया गया। प्रदेश के सभी जिलों से एक डॉक्टर और दो नर्स कैंसर के इलाज के लिए प्रशिक्षित किए गए। उन्हें मुंबई में विशेष ट्रेनिंग दी गई। ये सभी जिलों में पदस्थ हैं।naidunia

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