अगर आप भी अभी बनी हैं मां, तो ध्यान रखें इस बात का.. वरना खो सकती हैं अपने जिगर का टुकड़ा

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जोधपुर.

डॉ. सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के अधीन उम्मेद अस्पताल और मथुरादास माथुर अस्पताल में संचालित जनाना विंग में अप्रेल से लेकर जून तक करीब 30 नवजात शिशुओं की किडनी फेल होने से मौत हो गई। ये सभी नवजात शिशु एक दिन से लेकर 30 दिन की उम्र के थे। मां की ओर से अपने शिशुओं को समय पर दूध नहीं पिलाने के कारण वे गर्मी और निर्जलीकरण का शिकार हो गए, जिसके कारण उनकी किडनियां सूख गईं।

एक्यूट किडनी इंजरी से ग्रस्त तीन नवजात अभी भी उम्मेद अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि डॉक्टरों ने जैसे-तैसे कर के 70 बच्चों को स्वस्थ कर घर भी भेजा। परेशान डॉक्टरों ने सभी माताओं को अपने बच्चों को गर्मी में अधिक से अधिक दूध पिलाने की सलाह दी है, ताकि उनके शिशुओं के शरीर में पानी की कमी नहीं रहे।

नवजात के लिए घातक गर्मी के 3 महीने

अप्रेल से लेकर जून तक तेज गर्मी पड़ती है। इससे शिशु के शरीर का तापक्रम बढ़ जाता है और वे मां का दूध पीना कम कर देते हैं। इससे उनके शरीर में मूत्र भी कम बनता है और धीरे-धीरे गुर्दे सूखने लगते हैं। डिहाइड्रेशन से उनकी किडनी काम करना बंद कर देती है और संक्रमण हो जाता है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके विश्नोई ने बताया कि किडनी फेलियर से ग्रस्त शिशुआें में यूरिया 300 से लेकर 500 मिलीग्राम प्रतिशत और क्रिएटिनिन 11 तक पाया गया है। जबकि सामान्यत: यूरिया 15 से 40 और क्रिएटिनिन 0.5 के आसपास होता है। वैसे छह महीने तक शिशुओं को केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए, लेकिन यह नियम बीमार शिशु के लिए लागू नहीं है। अगर शिशु बीमार है तो उसे ऊपर का दूध और पानी भी पिलाना चाहिए ताकि उसे ड्रिहाइड्रेशन से बचाया जा सके।

अप्रेल में 36 में से 10 मरे

अप्रेल महीने में किडनी फेलियर से ग्रस्त कुल 36 शिशु आए। इसमें से 28 शिशु केवल मां के दूध पर निर्भर थे और 8 जने ऊपर का दूध पी रहे थे। इसमें से 22 जने रिस्क यानी स्टेज-1 के रोगी थे। इन शिशुओं में से 11 को यूरेमिक एनसिफेलोपैथी हो गई थी यानी गुर्दों का जहर मस्तिष्क में चढ़ गया था। इलाज के दौरान 10 शिशुओं को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। इसमें से 10 जनों की मौत हो गई। -डॉ. प्रमोद शर्मा, शिशु रोग विभागाध्यक्ष, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर

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