अब कृत्रिम फेफड़ों की मदद से दमे का इलाज हो सकता है

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    • एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 20 फीसदी लोग सांस संबंधी बीमारियों की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों द्वारा तैयार कृत्रिम फेफड़े से इसका इलाज संभव हो सकता है।

    वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में छोटे कृत्रिम फेफड़े तैयार किए हैं। इस विकसित छोटे कृत्रिम फेफड़े से दमा जैसी सांस की गंभीर बीमारियों के प्रभावी इलाज के साथ इन बीमारियों को समझने और इनसे बचाव का उपाय खोजने में भी मदद मिलेगी। वैज्ञानिको का दावा है कि,यह विकसित फेफड़ा कैंसर से जूझ रहे मरीजों के इलाज में मददगार साबित होगा।

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    एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 20 फीसदी लोग सांस संबंधी बीमारियों की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। इस कृत्रिम फेफड़े का निर्माण लैब में विकसित स्टेम कोशिकाओं की मदद से तैयार किया गया है।

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    अमेरिका की मिसिगन यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक “जीव विज्ञान विभाग की छात्रा ब्रियाना डाई” का कहना है कि, यह फेफड़ा शरीर में प्रत्यारोपित होने के आठ सप्ताह बाद पूरी तरह व्यस्क फेफड़े की तरह काम करने लगता है। जिसके माध्यम से आसानी से सांस ली जा सकती है। इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता मिसिगन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ‘जैसन स्पेंस’ ने बताया कि यह कृत्रिम फेफड़ा चूहे के शरीर में  प्रत्यारोपित करने के बाद मानव ऊतकों की तरह काम करता है। और कई मायनों में यह इंसानी फेफड़े का प्रतिरूप है।

    मिसिगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस तकनीक से सांस की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी। कृत्रिम फेफड़ा दमा और फेफड़ा के कैंसर के मरीजों को दी जाने वाली दवाई का असर जांचने में काफी सक्षम है। किसी दवा का असर इंसान के फेफड़े पर कितना पड़ता है, इसकी जांच इस फेफड़े की मदद से कर सकेंगे।

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