आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश वेबिनार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री सखलेचा का सम्बोधन

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    आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश वेबिनार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री सखलेचा का सम्बोधन


    कृषि विज्ञान प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी युवा उद्यमियों और किसानों के लिए बेहद उपयोगी-मंत्री श्री सखलेचा 


    भोपाल : शनिवार, दिसम्बर 26, 2020, 19:38 IST

    कृषि विज्ञान प्रयोगशालाओं में अनुसंधान और विकास से विकसित प्रौद्योगिकी प्रदेश के युवा उद्यमी और किसानों के लिए बेहद उपयोगी होगी। इससे उद्यमी और किसान स्वयं आत्मनिर्भर तो बनेंगे ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की संकल्पना को भी मूर्त रुप मिलेगा।

    ये विचार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने शनिवार को वेबिनार को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

    मंत्री श्री सखलेचा ने कहा कि आत्मनिर्भर देश और प्रदेश के निर्माण में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों और प्रौद्योगिकी यानी व्यावहारिक विज्ञान के मिलन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमने कृषि आधारित उद्योगों और कृषि के विकास में युवा उद्यमियों को जोड़ने और प्रौद्योगिकी की जानकारी विशेषज्ञों के माध्यम से उपलब्ध कराने के उदेश्य से वेबिनार श्रृंखला आयोजित की गई है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि हमने आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की वेबिनार श्रृंखला की शुरुआत रक्षा एवं अनुसंधान एवं विकास संगठन ‘डीआरडीओ से की थी, जिसका उद्देश्य प्रदेश के युवा उद्यमियों को रक्षा विज्ञान की स्वदेशी प्रौद्योगिकी से परिचित कराना था। मेपकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि वेबिनार का उद्देश्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यमों से जोड़ना और देश की विज्ञान प्रयोगशालाओं में विकसित प्रौद्योगिकी से प्रदेश के युवा उद्यमियों को परिचित कराना है। वेबिनार में मध्यप्रदेश के सभी 52 जिलों के उदीयमान उद्यमियों, जिला उद्योग अधिकारियों, स्टॉर्टअप होल्डरों और परिषद के वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

    वेबिनार का आयोजन मेपकॉस्ट, एमएसएमई विभाग, म.प्र. शासन और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्ववावधान में किया गया था। वेबिनार का विषय था ‘सेंट्रल इंस्टीटयूट ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यमों के लिए अवसर रखा गया था।

    सेंट्रल इंस्टीटयूट ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग (सीआईएई), भोपाल के निदेशक डॉ.सी.आर.मेहता ने अपने प्रजेंटेशन के दौरान एग्रीकल्चर मेकेनाइजेशन के लिए विकसित नई प्रौद्योगिकी के बारे में बताया।

    कृषि में डिवीजन के प्रमुख डॉ. पी.सी. बारगले ने कृषि प्रसंस्करण और सेवाओं में प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण पर विचार व्यक्त किये। विज्ञान भारती के जनरल सेक्रेटरी और यूआईटी, आरजीपीवी के निदेशक डॉ. एस.एस. भदौरिया ने कृषि क्षेत्र में आरएंडडी के लिए इंजीनियरिंग छात्रों की भूमिका पर व्याख्यान के दौरान बताया कि कृषि को आधुनिक बनाने और पैदावार को बढ़ाने के लिए इंजीनियरिंग के छात्रों को शिक्षण-प्रशिक्षण और नवाचारों के लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता है।


    राजेश बैन

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