आयुष्मान भारत योजना: फोन पर मंजूरी के साथ ही शुरू हो जाएगा गंभीर मरीजों का इलाज

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आयुष्मान भारत योजना: फोन पर मंजूरी के साथ ही शुरू हो जाएगा गंभीर मरीजों का इलाज

भोपाल। आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में मरीजों का फौरन इलाज शुरू हो जाएगा। अस्पताल को मरीज के इलाज के लिए किसी तरह की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। सभी तरह के मरीज के लिए यही मापदंड रहेगा। गंभीर स्थिति निजी अस्पताल में भी मरीज का तुरंत इलाज शुरू हो जाएगा। निजी अस्पताल को फोन पर स्टेट हेल्थ एजेंसी की सहमति लेना होगी।

 हां, निजी अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों का इलाज शुरू होने में अधिकतम 4 से 6 घंटे लग सकते हैं। प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना 25 अगस्त को पूरी तरह से शुरू होने जा रही है। इसमें यह प्रावधान किया गया है। प्रदेश 1.39 करोड़ परिवारों (करीब छह करोड़ लोग) को योजना का फायदा मिलेगा।
आयुष्मान भारत योजना: फोन पर मंजूरी के साथ ही शुरू हो जाएगा गंभीर मरीजों का इलाज
दूसरे तरह के स्वास्थ्य बीमा के तहत इलाज शुरू होने के पहले लंबी औपचारिकता करना पड़ती है। बीमा एजेंसी से सहमति लेने के बाद ही इलाज शुरू हो पाता है। इसमें काफी समय लगता है। बिना मंजूरी इलाज शुरू होने पर क्लेम नहीं मिल पाता। आयुष्मान भारत योजना में यह बड़ी राहत है।

आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अफसरों ने बताया कि इलाज के लिए सहमति देने के लिए राज्य स्तर पर स्टेट हेल्थ एजेंसी का गठन किया जाएगा। इसमें हर विषय के डॉक्टर रहेंगे। अस्पताल मरीज से संबंधित पूरी जानकारी ऑनलाइन अपलोड करेंगे। जांच रिपोर्ट देखने के बाद अधिकतम 4 से 6 घंटे में इलाज के लिए मंजूरी मिल जाएगी।

स्टेट हेल्थ एजेंसी का गठन होने में समय ज्यादा लगा तो जिला अस्पतालो के मेडिकल बोर्ड को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।

1350 बीमारियों में 466 का इलाज सिर्फ सरकारी अस्पताल में

योजना में 1350 बीमारियां शामिल की गई हैं। इनमें 466 ऐसी हैं जिनका इलाज सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही मिलेगा। यह जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज हो सकते हैं। प्रसव की सुविधा भी सिर्फ सरकारी अस्पतालों में रहेगी। बाकी बीमारियां निजी और सरकारी अस्पताल दोनों के लिए रहेंगी। यह मरीज की इच्छा पर रहेगा के वह कहां पर इलाज कराएगा।

387 अस्पतालों ने अनुबंध के लिए किया आवेदन

अभी तक निजी और सरकारी मिलाकर 387 अस्पतालों के आवेदन अनुबंध के लिए आ चुके हैं। इनमें 51 जिला अस्पताल व 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज छोड़ बाकी निजी अस्पताल हैं। निजी अस्पतालों के लिए एनएबीएच की शर्त लगाई गई है। सिर्फ उसी अस्पताल से इलाज के लिए अनुबंध किया जा रहा है जिसे किसी भी स्तर का एनएबीएच सर्टीफिकेट मिला है।

एनएबीएच के पीछे सरकार का तर्क यह है कि इससे गुणवत्ता वाले अस्पताल में ही मरीजों का इलाज होगा। दूसरे अस्पताल भी योजना में शामिल होने के लिए गुणवत्ता सुधारकर एनएबीएच सर्टीफिकेट हासिल करेंगे। यह भी व्यवस्था की गई है जिन निजी अस्पतालों का राज्य बीमारी सहायता निधि के तहत अनुबंध है, उनसे बिना निरीक्षण किए ही अनुबंध कर लिया जाएगा। अन्य अस्पतालों का निरीक्षण करने के बाद ही अनुबंध किया जाएग।

क्या है योजना

योजना के तहत पात्र परिवार के सदस्यों को हर साल 5 लाख रुपए तक के नि:श्ाुल्क इलाज की सुविधा है। इसमें 2011 की सामाजिक, आर्थिक जनगणना में श्ाामिल परिवार (गरीब समेत), संबल योजना व खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे में आने वाले परिवार शामिल हैं।

क्या है एनएबीएच

क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा यह सर्टीफिकेट दिया जाता है। इसके क्रमश: तीन चरण एंट्री लेवल, प्रोग्रेसिव व फाइनल लेवल होते हैं। अस्पताल में मरीजों से जुड़ी सुविधाएं, संक्रमण रोकथाम व प्रोटोकाल का पालन मापदंड के अनुसार होने पर प्रमाणपत्र दिया जाता है।

source : naidunia

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