इस मौसम में धूल कणों से परेशान है जोधपुर, श्वास व हृदय रोगियों के लिए खतरा

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    जोधपुर

    आंधी चलने से इन दिनों जोधपुर सहित थार के कई इलाकों की हवा में धूल कणों की वजह से काफी प्रदूषण है। हवा में छोटे धूल कणों यानी पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की मात्रा ढाई सौ के करीब पहुंच गई है, जिससे अस्थमा रोगियों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। हवा में अन्य प्रदूषकों सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का स्तर काफी कम है यानी गाडि़यों व फैक्ट्रियों की वजह से होने वाला प्रदूषण काबू में है। हवा में धूल कण बढऩे से चिकित्सकों ने श्वास व हृदय रोगियों को संभलकर रहने की सलाह दी है।

    राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल (आरएसपीसीबी) की ओर से मंगलवार को जारी डाटा के मुताबिक जयपुर, जोधपुर और उदयपुर में सर्वाधिक प्रदूषित शहर जोधपुर था। वायु गुणवत्ता के मापकों में जोधपुर को पुअर रेटिंग दी गई। वहीं उदयपुर की हवा सबसे बेहतर मिली जो श्वास रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है। पिछले साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से भी प्रदेश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर जोधपुर को इसलिए घोषित किया गया है क्योंकि यहां पीएम 2.5 और पीएम 10 सबसे अधिक है। भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार जोधपुर मरुस्थल का प्रवेश द्वार है और यहां हर दो चार दिन में धूल भरी हवा चलती ही रहती है। वैसे मण्डल के मुताबिक बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और चूरू की हवा में भी धूल कण अधिक है।

    तेज हवा की वजह से राहत

    आरएसपीसीबी की वैज्ञानिक डॉ. आभा टाक ने बताया कि अप्रेल, मई और जून में धूल कणों का स्तर अपेक्षाकृत अधिक होता है क्योंकि इन दिनों जोधपुर में धूल भरी हवा चलती रहती है। राहत की बात यह है कि तेज हवा चलने से धूल एक स्थान पर निलंबित नहीं रहती है।

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