एक रिसर्च के अनुसार, शिशु के लिए दोपहर की नींद नुकसानदेह है

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    नई दिल्ली।

    बच्चों के लिए नींद कितनी जरूरी होती है शायद इसका अंदाजा एक माँ ही लगा सकती है। अपने बच्चों के नींद का पूरा ख्याल रखना उनका फर्ज होता है। क्योंकि जब बच्चे अपनी नींद अच्छी तरह से लेते हैं तो इसका असर उसके पूरे स्वास्थ्य पर पड़ता है। शिशुओं को ज्‍यादा देर तक सुलाने की सलाह चिकित्‍सक भी देते हैं, और उनके संपूर्ण विकास के लिए यह सही भी है। लेकिन जैसे-जैसे बच्‍चा बड़ा होता जाता है सोने में कमी होने लगती है।

    एक रिसर्च के अनुसार, शिशुओं के लिए दोपहर की नींद हानिकारक है, हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आयी। दोपहर की झपकी या नींद से शिशु की रात्रि निद्रा का समय प्रभावित होता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि दो साल से ऊपर के बच्चों में दोपहर की नींद का उनकी रात्रि निद्रा पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

    ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता केरेन थोर्पे ने बताया कि उनकी टीम यह पता लगाना चाहती थी कि शिशुओं में दोपहर की नींद का उनकी रात्रि निद्रा की गुणवत्ता, उनके व्यवहार, संज्ञानात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। शोध के अनुसार नींद और व्यवहार, विकास एवं संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव में अंर्तसबंध है। यह अध्ययन जर्नल ‘अर्काइव्स ऑफ डिजीज इन चाइल्डहुड’ के ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित हुआ है।

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