फिर भी कट रही है मरीजों की जेब

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    टोंक

    टोंक. अस्पताल में चिकित्सकों के कम समय बैठने से मरीजों को परामर्श व जांच का सौदा महंगा साबित हो रहा है। कई चिकित्सक अस्पताल के स्थान पर बाजार की लैब पर जांच कराने के लिए दबाव डालते हैं। मजबूरी में मरीजों को भारी-भरकम राशि खर्च कर जांच करानी पड़ रही है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना के तहत जिला अस्पताल मेंं 56 प्रकार की जांचें नि:शुल्क की जाती है।

    इनमें खून में कमी, खून में संक्रमण, मलेरिया, रक्तप्रवाह का समय, रक्त कोशिकाओं का विकार, मधुमेह, रोग प्रतिरोधकों की जांच, पुरुषत्व, गुर्दे, लीवर, कैल्सियम, हृदय, अग्नाशय, जोड़ों का दर्द, कोलेस्ट्रॉल, वसा, सीफलिस, एड्स, टीबी, थूक, टायफायड, गठियाबाय, मूत्र, मल, एक्स-रे, सोनोग्राफी आदि शामिल हैं, लेकिन कई चिकित्सकों की ओर से मरीजों को एक बार बाहरी जांच भी कराने का परामर्श दिया जा रहा है।

    चिह्नित पर भेजते हैं

    परिजनों का कहना है कि चिकित्सक को घर पर दिखाने के बाद जांचें कराने की पर्चियां यह कहते हुए थमाई जा रही है कि फलां दुकान पर जाना। कई चिकित्सक बाहरी जांच रिपोर्ट देखकर ही मरीज का उपचार शुरू करते हैं।

    केस एक

    बनेठा क्षेत्र से आए प्रभुलाल ने गत दिनों सआदत अस्पताल में मलेरिया की जांच कराई। इसमें मलेरिया की पुष्टि नहीं हुई। जबकि चिकित्सक उसे मलेरिया से ग्रसित मानते हुए उपचार दे रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि कई बार जांच में मलेरिया नहीं आने के बावजूद मरीज में मलेरिया के ही लक्षण होते हैं।

    केस दो

    जिले में उद्योगों की स्थापना तथा उन्हें विकसित करने के लिए सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले जिले को औद्योगिक दृष्टि से अति पिछड़ा घोषित करना होगा। इसके साथ ही प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जानी चाहिए।

    इसमें उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को ऋण पर ब्याज में कमी, अनुदान तथा अन्य सुविधाएं भी देनी होगी। इसके अलावा जिले में फैक्ट्रियों, ईंट भट्टा, दुकान, भवन निर्माण समेत अन्य कार्यों में मजदूरी करने वालों का पंजीयन किया जाना चाहिए। उन्हें सम्बन्धित फर्म से न्यूनतम मजदूरी भी दिलाई जानी चाहिए।

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