भोपाल के हमीदिया अस्‍पताल में आएगी वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस

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भोपाल के हमीदिया अस्‍पताल में आएगी वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस

भोपाल। राजधानी के हमीदिया अस्पताल में पहली बार एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) वाली एंबुलेंस चलेगी। सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों के लिए एएलएस एंबुलेंस दान की है। इसमें गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल भी शामिल है।

एंबुलेंस का फायदा हमीदिया और सुल्तानिया दोनों अस्पतालों के मरीजों को मिलेगा। इसमें छोटा वेंटिलेटर, मल्टी पैरा मानीटर, दो-दो आक्सीजन सिलेंडर व अन्य जीवन रक्षक उपकरण रहेंगे। इन उपकरणों को चलाने व मरीजों के इलाज के लिए प्रशिक्षित स्टाफ भी रहेगा। जीवन रक्षक दवाएं भी एंबुलेंस में रहेंगी।

इससे गंभीर मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने में आसानी हो जाएगी। हमीदिया अस्पताल में अभी चार एंबुलेंस हैं, पर यह सिर्फ दिखावे के लिए हैं। एक-दो एंबुलेंस को डॉक्टरों को लाने-ले जाने के लिए उपयोग किया जाता है। बाकी खड़ी हुई हैं। लंबे समय से नहीं चलने की वजह से कुछ वाहनों की हालत खराब हो रही है।

28 लाख में तैयार होगी एक एंबुलेंस

चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अधिकारी ने बताया कि कंपनी की तरफ से राशि मिलेगी। इस राशि से ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर और भोपाल के मेडिकल कॉलेज में एएलएस एंबुलेंस खरीदी जाएंगी। एंबुलेंस की खरीदी संबंधित कॉलेजों के डीन करेंगे। एक एंबुलेंस ख्ारीदने का खर्च 28 लाख के करीब आएगा।

भोपाल के हमीदिया अस्‍पताल में आएगी वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस

इन मरीजों को होगा फायदा

-ऐसे मरीज जो वेंटिलेटर पर हैं, जिन्हें जांच के लिए कहीं बाहर ले जाना है।

-रेफर होने पर गंभीर मरीजों को एम्स, रेलवे स्टेशन या फिर एयरपोर्ट पहुंचाने मेें।

-सुल्तानिया अस्पताल से मरीजोें को हमीदिया शिफ्ट करने में।

-हार्ट के मरीजों को एक हमीदिया से दूसरे अस्पताल लाने-ले जाने में।

-शहर में कहीं भी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आने पर उधार लेना पड़ती है एंबुलेंस

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या फिर किसी अन्य वीवीआईपी के दौरे के लिए एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली एंबुलेंस की जरूरत होती है। इसके लिए डॉॅक्टरों की टीम व एंबुलेंस का इंतजाम करना मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी होती है, लेकिन हमीदिया अस्पताल में एएलएस एंबुलेंस नहीं होने की वजह से चिरायु मेडिकल कॉलेज या फिर बीएमएचआरसी से लेनी पड़ती थी।

source : zeenews

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