भोपाल दुष्कर्म : काम के दबाव में सहमति के बाद नहीं लिखना भूली डॉक्टर

0
136

जबलपुर। भोपाल सामूहिक दुष्कर्म मामले पर जबलपुर हाईकोर्ट में दायर की गई स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सोमवार को फिर सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने पूरे मामले की स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट के सामने रखी।

सरकार ने डॉक्टरों की ओर से हुई लापरवाही पर स्पष्टीकरण पेश करते हुए बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में हुई गड़बड़ी एक मानवीय भूल थी, लेकिन इस गलती पर भी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय शुक्ला की खंडपीठ में चल रही सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि घटना में दोषी पाए गए पुलिस कर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है। 3 टीआई और दो एसआई को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया।

पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में हुई गड़बड़ी को लेकर दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कारवाई की गई है। एक डॉक्टर को टर्मिनेट व दूसरे को सस्पेंड कर दिया गया है।

महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकार ने इस घटना के बाद से ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए और भी सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं सरकार ने महिलाओं में जागरूकता लाने एक एप भी लॉन्च किया है। सरकार अब तक 15 लाख से ज्यादा महिलाओं को जागरूक करने का काम कर चुकी है। अगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी।

कोर्ट रूम लाइव…

महाधिवक्ता – स्टेटस रिपोर्ट पेश कर बताया कि मामले की चार्जशीट 15 नवंबर को फाइल कर दी गई है। इसके अलावा भोपाल की अदालत में डे टू डे सुनवाई शुरू हो गई है।

कोर्ट – मामले में डॉक्टर की क्या भूमिका रही?

महाधिवक्ता – डॉक्टर की यह गलती रही कि उसने रिपोर्ट में लिखा कि जो भी संबंध बने वे सहमति से बने। वे सहमति के बाद नहीं लिखना भूल गईं। यह मानवीय भूल है क्योंकि उस दिन अस्पताल में बहुत ज्यादा मरीज रहे इस कारण प्रेशर में यह गलती हो गई।

कोर्ट – पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?

महाधिवक्ता – अब तक मामले से संबंधित 3 टीआई, 2 एसआई को सस्पेंड कर दिया गया है। एक एएसपी को नोटिस जारी हो चुका है। पुलिस के खिलाफ पूरी कार्रवाई करने 15 दिन का समय दिया जाए।

कोर्ट – मामले की सुनवाई 8 जनवरी को होगी जिसमें पूरी कंप्लाइन रिपोर्ट अदालत में पेश करें।

Share and Enjoy !

0Shares
0 0