मध्यप्रदेश भूकम्प की जोन 2 एवं 3 में

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    मध्यप्रदेश भूकम्प की जोन 2 एवं 3 में

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    मध्यप्रदेश भूकम्प की जोन 2 एवं 3 में


    भूकम्प के समय घबराएं नहीं, सावधानियां बरतें
    राहत व सुरक्षा के सारे इंतजाम किए गए हैं
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने राज्य आपदा प्रबंधन की बैठक ली
     


    भोपाल : सोमवार, नवम्बर 23, 2020, 20:01 IST

    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि गत दिनों प्रदेश के सिवनी, बालाघाट, बड़वानी, अलीराजपुर, छिंदवाड़ा, मंडला आदि जिलों तथा उनके समीप भूकंप के झटके महसूस किए गए। इनमें रिक्टर स्केल पर सर्वाधिक तीव्रता 4.3, सिवनी में आए भूकंप की थी। मध्यप्रदेश भूकम्प के जोन 2 व 3 में आता है, जो खतरनाक श्रेणी नहीं है। जोन 4 एवं 5 खतरनाक श्रेणी में आते हैं जहां भूकम्प की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 से अधिक रहती है। सरकार द्वारा भूकम्प उन्मुख सभी क्षेत्रों में राहत एवं बचाव की सारी व्यवस्थाएं की गई हैं। धैर्य रखें, घबराएं नहीं तथा सभी आवश्यक सावधानियां बरतें।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में राज्य आपदा प्रबंधन की बैठक ले रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा तथा सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

    वाटर लैवल में अंतर है संभावित कारण

    गत दिनों प्रदेश में आए भूकंप के संभावित कारणों की समीक्षा में बताया गया कि वाटर लैवल में परिवर्तन इस बार आए भूकंप का संभावित कारण है। इस बार सर्वाधिक 4.3 तीव्रता का भूकंप सिवनी में आया, जिसका एपीसेंटर सिवनी शहर के ठीक नीचे था।

    गत दिनों प्रदेश में आए भूकम्प

    मध्यप्रदेश में 22 नवम्बर को सिवनी शहर में रिक्टर स्केल पर 4.3 तीव्रता का, कटंगी बालाघाट में 2.4 तीव्रता का, कुरई सिवनी में 1.8 तीव्रता का तथा बरघाट केवलारी में 2.7 तीव्रता का भूकंप आया। इसी प्रकार 07 नवंबर को बड़वानी एवं अलीराजपुर के समीप 4.2 तीव्रता का, सिवनी जिले के पास ही 27 अक्टूबर को 3.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके मंडला और बालाघाट में भी आए, 31 अक्टूबर को छिंदवाड़ा में 3.2 तीव्रता का तथा सिवनी जिले के पास 3.5 तीव्रता का भूकंप आया।

    भूकम्प के समय ये सावधानियां बरतें

    • जहां है वहीं रहें, संतुलित रहें। हड़बड़ी घातक हो सकती है।

    • यदि घर के अन्दर हैं, तो गिर सकने वाली भारी वस्तुओं से दूर रहें।

    • खिड़कियों से दूर रहें। मजबूत मेज के नीचे छुपें।

    • चेहरे व सिर को हाथों की सुरक्षा प्रदान करें व कम्पन रूकने तक सिर को हाथों की सुरक्षा में रखें।

    • अगर घर से बाहर हैं तो खुली जगह तलाशें। भवनों, पेड़ों, बिजली के खम्भों व तारों से दूर रहें।

    • अगर वाहन में हो तो रूकें और अन्दर ही रहें।

    • पुल, बिजली के तारों, भवनों, खाई और तीव्र ढाल वाली चट्टानों से दूर रहें।

    • बिजली के उपकरण व खाना पकाने की गैस बन्द कर दें।

    • टूटे सामान से पैर चोटिल हो सकते है, अत: जूते पहन कर रखें।

    • अगर काई ज्वलनशील पदार्थ फैल गया है, तो तुरन्त उसे साफ करें।

    • यदि आग लग गयी है और धुआं है, तो लेट कर बाहर निकलने का प्रयास करें। ऐसे में साफ हवा जमीन के नजदीक ही मिलेगी।


    पंकज मित्तल

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