मरीजों की परेशानियां देखी न सुनी, निरीक्षण के बाद मंत्री बोले हमीदिया ‘अद्वितीय’

0
1120

भोपाल। चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शरद जैन बुधवार को हमीदिया अस्पताल का निरीक्षण कर रहे थे। निरीक्षण के बाद मंत्री बोले, ‘हमीदिया सुविधाओं के लिहाज से अद्वितीय हैं’। उन्हें उन मरीजों की तकलीफ से कोई वास्ता नहीं दिखा जो बारिश के पानी से बचने बिस्तर सिमटकर बैठ जाते हैं। अस्पताल में बंद पड़ी मशीनें, जाचं-दवाओं के लिए परेशान हो रहे मरीजों की पीड़ा के बाद भी मंत्री ने कहा सब बेहतर है।

मंत्री पहली बार हमीदिया अस्पताल के दौरे पर आए थे। उनके आने की सूचना एक दिन पहले ही अस्पताल प्रबंधन को मिल गई थी। लिहाजा अपने-अपने ड्रेस कोड में डॉक्टर, नर्स व अन्य कर्मचारी समय पर अस्पताल पहुंच चुके थे। मंत्री सुबह 9 बजे हमीदिया अस्पताल पहुंचे। हर जगह सिक्यूरिटी गार्ड तैनात थे। अस्पताल के बाहर भी सफाई व्यवस्था बेहतर थी। वे सबसे पहले इमरजेंसी पहुंचे। यहां से ओपीडी, सर्जिकल वार्ड 2, किचेन, कमला नेहरू अस्पताल स्थिति बर्न वार्ड व पीडियाट्रिक वार्ड का निरीक्षण किया। ब्लड बैंक व दवा स्टोर की देखने भी गए। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सबकुछ बेहतर है। मंत्री जी अगर बिना बताए कभी हमीदिया अस्पताल पहुंचें वह भी रात में तो हकीकत कुछ और हो सकती है। आम आदमी बनकर मरीज की पीड़ा महसूस की जा सकती है। इसके पहले पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री नरोत्तम मिश्रा व प्रमुख सचिव प्रभांशु कमल के दौरे की जानकारी भी एक दिन पहले स्टाफ को मिल गई थी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव प्रभांशु कमल ने पिछले महीने हमीदिया अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्हें अस्पताल में दवाओं की कमी समेत कई अव्यवस्थाएं दिखी थीं।

समस्याएं जिन्हें देखना-समझना था

– साल भर से ज्यादा समय से कैज्युअल्टी की लिफ्ट खराब है।

– गरीबी रेखा के मरीजों को भी अपने खर्च पर इलाज कराना पड़ रहा है।

– कैथलैब ने दम तोड़ दिया है। 10 हजार रुपए देकर गरीब मरीज बाहर से एंजियोग्राफी करा हैं।

– हड्डी वार्ड के बाहर गैलरी में भर्ती मरीजों के ऊपर खिड़की से बारिश का पानी अंदर आता है।

– नई ओपीडी बिल्डिंग बजट नहीं होने की वजह से 7 साल बाद भी अधूरी है। पैसा नहीं मिलने से ठेकेदार ने काम बंद किया।

– ट्रामा यूनिट में बेड के अलावा कोई सुविधा नहीं है।

– बारिश में भी मरीजों को स्ट्रेचर में भीगते हुए एक्सरे-सोनोग्राफी के लिए कमला नेहरू अस्पताल ले जाना पड़ता है। इमरजेंसी से वार्डों में मरीज ले जाने में यही दिक्कत होती है।

-मरीजों की चादर चार दिन में बदली जाती हैं। वार्डों में कॉकरोच व खटमल हैं।

– दो में से एक सोनोग्राफी मशीन खराब पड़ी है।

मरीज की पीड़ा

‘मेरी बेटी रिया (6 साल)को हेपेटाइटिस बी है। 5 जुलाई से कमला नेहरू अस्पताल के पीडियाड्रिक वार्ड में भर्ती है। दीनदयाल अंत्योदय योजना का कार्ड होने के बाद भी 9 हजार रुपए की दवाएं और जांच अपने पैसे से करा चुके हैं। मंत्री के आने का इंतजार कर रहे थे, पर वे तीसरी मंजिल से लौट गए। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कुछ जाचें व दवाएं हमीदिया में नहीं होती, इसलिए बाहर से कराना पड़ रही हैं।’

भारत सिंह दांगी, मरीज के पिता

मंत्री के बोल

‘हमीदिया अस्पताल के ब्लड बैंक में सुविधाएं बेहतर हैं। हमने हर जगह निरीक्षण किया है। हमीदिया अस्पताल हर जगह साफ-सुथरा है, अच्छी सुविधाएं हैं। जूडा द्वारा मारपीट की शिकायत हमारे पास आज तक नहीं आई है। हमीदिया को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाएंगे। मरीजों को कोई परेशानी है।

शरद जैन, चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री

2017 नहीं, जनवरी 17 है एक्सपायरी

मंत्री ने दवा स्टोर में दवाओं के डिब्बे की एक्सपायरी डेट देखी। एक डिब्बे में प्रिटिंग गलत थी। उन्होंने कहा, मैं यह देखना चाह रहा हूं कि नजदीक एक्सपायरी डेट की दवाएं तो नहीं हैं। दरअसल, यह एक कला है। आप समझ रहे होंगे। मंत्री ने दवा का दूसरा डिब्बा उठाया तो अस्पताल अधीक्षक डॉ. डीके पाल ने कहा कि इसकी एक्सपायरी 2017 है। इस पर मंत्री बोले, डॉक्टर साहब 2017 नहीं जनवरी 17 है। आप समझ रहे होंगे। यह बोलने की बात नहीं समझने की है। उनका इशारा एक्सपायरी डेट के नजदीक की दवाओं की खरीदी को लेकर था।

Share and Enjoy !

0Shares
0 0