विज्ञान मंथन यात्रा का वर्चुअल भ्रमण जारी

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    विज्ञान मंथन यात्रा का वर्चुअल भ्रमण जारी


    विद्यार्थियों ने उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् की इनोवेशन लैब का किया भ्रमण और किया वैज्ञानिकों से संवाद
    यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ.राजेन्द्र डोभाल ने कहा-सामाजिक पूर्वाग्रहों के दौर में मेरी क्यूरी को मिला विज्ञान के दो विषयों में नोबेल पुरस्कार
     


    भोपाल : शुक्रवार, जनवरी 22, 2021, 22:22 IST

    मिशन एक्सीलेंस के अंतर्गत वर्चुअल माध्यम से विज्ञान मंथन यात्रा के तीसरे चरण में प्रदेश के विद्यार्थियों को दो सत्रों में देहरादून स्थित उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (यूकॉस्ट) की इनोवेशन लैब का भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों ने हैंड्स-ऑन-साइंस के अंतर्गत सरल और रोचक अनुभव भी किये।

    इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेन्द्र डोभाल ने विद्यार्थियों से कहा कि नब्बे के दशक में सबके हाथों में फोन केवल कल्पना थी, लेकिन आज हर व्यक्ति के पास फोन है। उन्होंने कहा कि आज चन्द्रमा पर जाने के लिए फोन पर पूछना वैज्ञानिक फंतासी (साइंस फिक्शन) हो सकता है, लेकिन आने वाले समय में लोग चांद पर जाने के लिए फोन पर शेड्यूल के बारे में पूछेंगे। डॉ.डोभाल ने कहा कि विज्ञान फंतासियों में कही गई कुछ बातें कभी-कभी आगे चलकर साकार हो जाती हैं।

    उन्होंने कहा कि उन दिनों फ्रांस सरकार ने महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रहों के चलते फ्लैगशिप फ्रेंच अकादमी फैलोशिप से मेरी क्यूरी को सम्मानित नहीं किया गया था, लेकिन मेरी क्यूरी ने विश्व के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दो विषयों-भौतिकी और रसायन विज्ञान में प्राप्त कर अपनी प्रतिभा से सभी को अचंभित कर दिया। आज समाज में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोंण में बदलाव आया है और उन्हें वरीयता दी जा रही है।

    देहरादून साइंस सिटी के सलाहकार डॉ. जी.एस. रौतेला ने ‘निम्न तापमान पर पदार्थ’ विषय पर बच्चों से संवाद करते हुए विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से बताया कि भारत सहित दुनिया भर में वैज्ञानिकों के बीच निम्न तापमान पर अति चालक पदार्थों को बनाने की स्पर्धा जारी है। उन्होंने सरल और रोचक प्रयोग करते हुए बताया कि द्रव नाइट्रोजन का रेफ्रीजरेशन और क्रायोजेनिक कार्यों में व्यापक उपयोग हो रहा है। इसका उपयोग चिकित्सा विज्ञान में विविध कार्यों के लिए हो रहा है, इसमें रेटिना की मरम्मत और कैंसर कोशिकाओं की चिकित्सा शामिल है। कोरोना वैक्सीन को संरक्षित करने में भी इसका उपयोग किया जा रहा है। केमिकल रिएक्शन, सुपर कंडक्टर पदार्थों और कोल्ड वेल्डिंग आदि के लिए द्रव नाइट्रोजन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    यूकॉस्ट की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. अपर्णा शर्मा ने डीएनए इज.ए.टूल फॉर इन्वेस्टीगेशन, विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि हमारी कोशिकाओं के केंद्रक में मौजूद क्रोमोसोम में डीएनए होता है। यही डीएनए एक व्यक्ति को दूसरे से भिन्न बनाता है। उन्होंने बताया कि अपराध संबंधी जांच के मामलों में छानबीन के लिए डीएनए, फिंगरप्रिंट प्रोफाइल का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि डीएनए प्रोफाइल की खोज ने आम जनता में आपराधिक न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा बढ़ाया है।

    डॉ. अपर्णा शर्मा ने प्रेजेंटेशन में बताया कि डीएनए प्रोफाइल का उपयोग पैतृक संपत्ति संबंधी विवादों, अज्ञात शवों की पहचान, मानव जनसंख्या के विकास, पूर्वजों की खोज और शिशुओं की अदला-बदली को रोकने में भी हो रहा है।

    विज्ञान मंथन यात्रा 23 जनवरी को

    विज्ञान मंथन यात्रा के चौथे चरण में 23 जनवरी 2021 को विद्यार्थियों को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, एज्युकेशन एंड रिसर्च (आइसर), चड़ीगढ़ का भ्रमण कराया जाएगा।


    राजेश बैन

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