शादी के बाद मिर्गी के दौरे नहीं आते धारण है गलत, इलाज ही है उपचार

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    कोटा. मिर्गी तनाव सभ्यता की ज्ञात सबसे पुरानी बीमारियों में गिनी जाती है। यह एक मस्तिष्क रोग है जिससे दुनिया भर में लाखो लोग प्रभावित होते है।

    मिर्गी एक सार्वभौमिक बीमारी जो किसी भी उम्र में स्त्री या पुरुष को हो सकती है। यह एक चिकित्सकीय रोग है जो दिमाग में अत्यधिक और असामान्य गतिविधि की वजह से होता है।

    विश्व में पांच करोड़ लोग और भारत में लगभग एक करोड़ लोग मिर्गी के रोगी है। विश्व की कुल जनसंख्या के 7-10 प्रतिशत लोगों को अपने जीवनकाल में एक बार इसका दौरा पडऩे की संभावना रहती है।

    सामान्यत: इसमें रोगी को दौरा पड़ता है शरीर अकड़ जाता है और मुंह से झाग आने लगता है। अधिकांश व्यक्तियों के लिए मिर्गी रोग आजीवन नहीं रहता परन्तु इसका प्रभाव कुछ सालों तक रहता है। नियमित रूप से इलाज करने से मिर्गी से प्रभावित मरीजों के दौरो को नियंत्रित किया जा सकता है।

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    सुकरात, जोंटी रोड्स, सिंकदर जैसी महान हस्तियों ने इस रोग से प्रभावित होने के बावजूद अपने क्षेत्र में शानदार बुलंदियों को छुआ है।

    मिर्गी मस्तिष्ट को प्रभावित करने वाले कई कारणों से होती है। 60-70 प्रतिशत मिर्गी मामलों के कारण अज्ञात होता है। शेष 25-40 प्रतिशत लोगों में पहचानने योग्य कारण निम्न हो सकते हैं।

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    जन्म के समय चोट या ऑक्सीजन की कमी, गर्भावस्था में मस्तिष्ट को क्षति, मस्तिष्क आघात, ब्रेन ट्यूमर, संक्रमण(दिमागी बुखार, एड्स आदि) नींद की कमी, चमकती रोशनी, तनाव, शराब, मासिक धर्म के दौरान हार्मोनल परिवर्तन आदि जैसे कारण मिर्गी के दौरों को बढ़ा सकते है।

    मिर्गी से संबंधित कुछ गलत धारणाएं एवं तथ्य: कुछ लोग इस बीमारी को भूत प्रेत का साया तक मानते हैं। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कुछ लोग मिर्गी के मरीज को डाक्टर के पास ले जाने की बजाय बाबाओं के पास ले जाना उचित समझते हैं।

    इसके पीछे उनका मत होता है कि मरीज पर किसी राक्षस या चुडै़ल का साया है। कुछ लोग मिर्गी के मरीज को पागल करार देते है। वास्तविकता में यह एक चिकित्सकीय रोग है जो दिमाग में अत्यधिक और असामान्य विद्युतीय गतिविधि की वजह से होता है।

    मिर्गी के मरीज को दौरा पडऩे के वक्त जूता या चप्पल सुंघाने से दौरा रुक जाता है। असल में अधिकतर दौरे स्वयं ही कुछ समय में बंद हो जाते है।

    मिर्गी के रोगी शादी के लिए अयोग्य होते हैं। भारत में महिलाओं के मामले में ये धारणा गलत है उचित उपचार के साथ रोगी एक सामान्य जीवन जी सकते है।

    मिर्गी से पीडि़त महिलाओं के बच्चे नहीं हो सकते। तथ्य यह है कि मिर्गी या मिर्गी विरोधी दवाएं प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करती हैं। गर्भावस्था के दौरान महिलाएं डॉक्टर की देखरेख में अपनी दवाई ले सकती है।

    मिर्गी एक मानसिक बीमारी है जबकि यह एक मस्तिष्क की बीमारी है।

    मिर्गी संक्रामक है। वास्तविकता में मिर्गी निश्चित रूप से संक्रामक नहीं है।

    मिर्गी वंशानुगत है इसके लिए शादी नहीं करनी चाहिए। जबकि बहुत ही कम मरीजों यह वंशानुगत होती है। इसका शादी से कोई संबंध नहीं है।

    विवाह मिर्गी का इलाज है तथ्य यह है कि सिर्फ उचित एवं नियमित उपचार ही मिर्गी का इलाज है।

    मानसिक तनाव या अवसाद से मिर्गी होती है जो कि बिल्कुल गलत धारणा है।

    दौरा होने पर क्या करें: मरीज के कपड़े, खासतौर पर गर्दन के आसपास वाले कपड़े ढीले कर दें ताकि मरीज को सांस लेने में तकलीफ न हो। मिर्गी के रोगी को कभी दबाना नहीं चाहिए। मरीज को धीरे से उसकी करवट पर लेटा दें। मरीज को चोट से बचने के लिए आसपास के फर्नीचर अथवा धारदार वस्तुएं हटा दें। मरीज को दौरा पडऩे पर जबरदस्ती पकडऩे या दौरा रोकने की या उसके मुंह में कुछ डालने की कोशिश न करें, ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। उसे बदबूदार जूते या सड़ा प्याज न सुंघाएं।

    दौरा खत्म होने के बाद मरीज जब तक होश में न आ जाए, उसे अकेला न छोड़ें और ना ही कुछ खिलाने की कोशिश करें। यदि मरीज का दौरा पांच मिनट से अधिक रहता है या फिर पहले दौरे के तुरंत बाद दूसरा दौरा आता है, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।

    यदि आप या आपके परिचित मिर्गी से पीडि़त हो तो मिर्गी के दौरों से ज्यादा दिन मुक्त रहने के लिए इन बातों का अवश्य ध्यान रखें:-

    निर्धारित समय पर अपनी दवा लें।

    मिर्गी के दौरों और इनकी संख्या की सही जानकारी दर्ज करें।

    अपने साथ हमेशा एक पहचान पत्र रखें, जिसमें आपके रोग एवं दवा की जानकारी एवं आपातकाल की स्थिति में किस परिचित से संपर्क करना है, वह साफ शब्दों में लिखा हो।

    यदि आप गर्भ निरोधक गोलियां या अन्य कोई दवा का सेवन कर रहे हो तो अपने डॉक्टर को अवश्य बताएं।

    नहाते समय बाथरूम का दरवाजा बंद न करें।

    रात को नियमित समय पर सो जाएं एवं पर्याप्त नींद लें।

    हमेशा अपनी दवा का पर्याप्त स्टॉक रखें ताकि दवा कभी कम न पड़े।

    निर्धारित मुलाकात के लिए डॉक्टर के पास अवश्य जाएं।

    जब तक डॉक्टर न कहे अपनी दवा लेना बंद न करें।

    न तो अपनी दवा किसी को दें और न ही किसी और की दवा लें।

    मिर्गी के रोगी उचित इलाज और सावधानियों के साथ एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते है।

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