सरकार ने इलाज के लिए पैसा दिया, दवा नहीं, रुकी दिल की सर्जरी

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भोपाल। राजधानी के हमीदिया अस्पताल में करीब एक दर्जन मरीजों की दिल की सर्जरी नहीं हो पा रही है। यह मरीज करीब 10 दिन से सर्जरी के लिए भर्ती हैं। इनके किसी के दिल का वाल्व बदला जाना है तो किसी की दूसरी सर्जरी होनी है। सर्जरी नहीं होने की वजह जरूरी दवाएं नहीं मिल पाना है।

यह मरीज गरीबी रेखा के नीचे के हैं। राज्य बीमारी सहायता निधि के तहत दिल की सर्जरी के लिए उन्हें शासन से राशि मिली है। मरीज के साथ ही यह राशि भी हमीदिया अस्पताल पहुंंच गई हैं। इस राशि से दवाएं व अन्य सामान खरीदा जाता है। दवाएं व सामान खरीदने के लिए अस्पताल प्रबंधन स्थानीय स्तर पर निविदा कर किसी सप्लायर से अनुबंध करता था।

हमीदिया अस्पताल में करीब छह महीनेे पहले अमृत फार्मेसी खुलने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने यह नियम बना दिया कि अस्पताल के लिए दवाएं व इंप्लांट (विभिन्न् अंगों में लगने वाले धातु के सामान) अमृत फार्र्मेसी से ही खरीदे जाएंगे। हार्ट की सर्जरी में लगने वाली दवाएं फार्मेसी में नहीं हैं।

अस्पताल प्रबंधन टेंडर और अनुबंध के बिना दूसरे सप्लायर से दवा नहीं ख्ारीद सकता। लिहाजा, दवा नहीं होने से सर्जरी नहीं हो पा रही है। करीब छह महीने से दवा के पुराने स्टॉक से मरीजों का इलाज किया जा रहा था। बता दें कि भारत सरकार ने देश के बड़े अस्पतालों में मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए अमृत फार्मेसी खोला है।

सिर्फ हमीदिया में सुविधा होने के बाद भी कोई सुध लेने वाला नहीं

प्रदेश में दिल की सर्जरी की सुविधा सिर्फ हमीदिया अस्पताल में है। यहां पर बाईपास सर्जरी, वाल्व बदलने, दिल में छेंद व अन्य बीमारियों की सर्जरी की जाती है। प्रदेश भर से मरीज यहां पर आते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी है। यहां एक मात्र कार्डियक सर्जन डॉ. प्रवीण शर्मा हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर का पद खाली है। कभी सर्जिकल सूजर (टांका लगाने का धागा) खत्म हो जाता है तो कभी दूसरा सामान।

केस 1- हमीदिया अस्पताल के सर्जिकल वार्ड 8 में सिंगरौली जिले से आए अवकाश कुमार (24) भर्ती हैं। चलने-फिरने में उनकी सांस फूलने लगती है। हमीदिया में डॉक्टरों को दिखाया तो डॉक्टरों दिल का वाल्व बदलने की सलाह दी। वे सर्जरी के लिए 1 मई को हमीदिया में भर्ती हो गए, लेकिन अभी तक उनकी सर्जरी नहीं हो पाई है। उन्हें यह भी नहीं पता है कि सर्जरी में देरी क्यों हो रही है।

केस 2- सर्जिकल वार्ड 8 में ही विदिशा जिले के चितरंगी गांव की किरण (24 साल) भर्ती हैं। उनके दिल का भी वाल्व बदला जाना है, लेकिन दवा नहीं मिल पाने की वजह से सर्जरी नहीं हो पा रही है। उनके देखरेख के लिए 3 परिजन भी अस्पताल में हैं। भर्ती हुए 10 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी सर्जरी नहीं हो सकी है। परिजनों को यह पता नहीं है कि सर्जरी क्यों नहीं हो पा रही है।

सर्जरी के लिए सबसे जरूरी मशीन के लिए छह महीने से किट ही नहीं

दिल के मरीजों की सर्जरी के पहले ऑटोमैटिक ब्लड गैस एनालाइजर (एबीजी) मशीन से मरीज की ब्लड गैस समेत कई करीब 20 तरह की जांचें की जाती हैं। एक बूंद खून में दो मिनट के भीतर यह जांचें हो जाती हैं। हमीदिया अस्पताल में पिछले डेढ़ साल के भीतर करीब 45 करोड़ के उपकरण, बेड, चादर व सामग्री खरीदी गई, लेकिन छह महीने से एबीजी मशीन के लिए किट नहीं खरीदी गई है। यहां कर महीने करीब 80 हजार रुपए की किट लगती है। मशीन नहीं होने से सर्जरी में मुश्किल आ रही है। बड़ी सर्जरी रोकना भी पड़ती है।naidunia

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