1000 बेड का अस्पताल : 9 साल में तीसरी बार स्थान बदलने की तैयारी

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1000 बेड का अस्पताल : 9 साल में तीसरी बार स्थान बदलने की तैयारी

ग्वालियर, । 1000 बेड का अस्पताल अब सपना बन चुका है। क्योंकि 9 साल में तीसरी बार अस्पताल का स्थान बदला जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव ने अब पॉटरीज की जमीन पर अस्पताल निर्माण की संभावना तलाशने के निर्देश मेडिकल कॉलेज को दिए हैं। संभागायुक्त ने इस सिलसिले में गुरुवार को पीआईयू एवं मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों की मीटिंग भी ली है। खास बात ये है कि यदि अस्पताल का स्थान बदला गया तो पांचवी बार नई डीपीआर तैयार होगी। इसके अलावा पॉटरीज की जमीन काफी कम है, इसलिए अस्पताल निर्माण के लिए आरटीओ से भी जमीन मांगना पड़ेगी।

पीआईयू ने जयारोग्य अस्पताल परिसर में प्रस्तावित 1000 बेड के अस्पताल की डीपीआर तैयार करके करीब एक माह पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजी थी। डीपीआर तो स्वीकृत नहीं हुई, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया ने अस्पताल का निर्माण पॉटरीज की जमीन पर करने का सुझाव जरूर दे दिया है। पीआईयू एवं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की परेशानी ये है कि पॉटरीज की जमीन महज 3.5 एकड़ है, जबकि जेएएच में जिस जमीन पर अस्पताल बनना था वह करीब 60 एकड़ है। ऐसे में 3 ब्लॉक में 7 मंजिल अस्पताल का भवन भला इतनी कम जमीन में कैसे हो सकेगा। पीएस के निर्देश का पालन किस प्रकार किया जा सकता है, इसके लिए संभागायुक्त बीएम शर्मा ने गुरुवार को पीआईयू एवं मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों की बैठक भी ली है।

अब पांचवी बार बनेगी डीपीआर –

-4 नवंबर 2009 को भूमिपूजन के समय 116 करोड़ की डीपीआर

-रिवाइज डीपीआर 294 करोड़ की तैयार हुई

-तीसरी डीपीआर में लागत बढ़कर 354 करोड़ हो गई

-चौथी और हाल ही में बनी डीपीआर करीब 350 करोड़ की थी

-प्रमुख सचिव के निर्देश के तहत यदि स्थान बदला तो अब पांचवी डीपीआर तैयार होगी

16 लाख दिए जा चुके हैं-

वर्ष 2009 में यह अस्पताल पॉटरीज की जमीन पर बनाने का निर्णय हुआ था। इसके लिए उद्योग मंत्री यशोधरा राजे से चर्चा के बाद गजराराजा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने करीब 16 लाख की राशि भी जमीन के लिए जमा करवा दी थी। इसके बाद निर्णय हुआ कि अस्पताल पॉटरीज की जमीन पर जबकि डॉक्टर एवं कर्मचारियों के आवास जेएएच परिसर में बनेंगे। अस्पताल और जेएएच समूह को जोड़ने के लिए सब-वे और फुटओवर ब्रिज भी बनाया जाएगा। हाल ही में तैयार हुई डीपीआर में पूरे अस्पताल का निर्माण ही जेएएच परिसर में होना था। प्रमुख सचिव के नए निर्देश के बाद अब पॉटरीज की जमीन पर 1000 बेड के अस्पताल के निर्माण की संभावनाएं तलाशना अफसरों ने शुरू कर दिया है।

पॉटरीज की जमीन पर बनाने में ये होगी दिक्कत –

-पॉटरीज की जमीन महज 3.5 एकड़ है, अस्पताल निर्माण के लिए कम है।

-जमीन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए परिवहन विभाग की पास में पड़ी जमीन मांगना होगी।

-इसमें कागजी प्रक्रिया में 2-3 माह तक का समय लग सकता है।

-पॉटरीज की जमीन को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में दिया गया है, यहां इस योजना में निर्माण कार्य होना है।

-ग्वालियर विकास समिति की आपत्ति के बाद भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में जमीन दी गई थी।

-यदि अस्पताल का निर्माण यहां होगा तो स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को कहीं दूसरी जगह ट्रांसफर करना होगा।

आचार संहिता लग गई तो फिर अटकेगा प्रोजेक्ट –

पॉटरीज की जमीन पर अस्पताल निर्माण की प्लानिंग का मतलब है कि 6 माह अभी कुछ नहीं होना है। क्योंकि नई डीपीआर बनने, अस्पताल निर्माण के लिए जमीन की आवश्यकता पूरी करने, डीपीआर स्वीकृति, वित्तीय स्वीकृति आदि की प्रक्रिया में ही 6 माह गुजर जाएंगे। विधानसभा चुनाव के चलते अगस्त-सितंबर माह में आचार संहिता लागू हो जाएगी, ऐसे में मामला अगले कुछ माह के लिए अटक जाएगा।

source : naidunia

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