50 की उम्र के बाद घुटने अच्छे रखना है तो जमीन पर न बैठें

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    इंदौर। जमीन पर बैठना तो आसान है लेकिन उठते वक्त घुटनों पर जो अतिरिक्त दबाव पड़ता है, वह भविष्य में दिक्कत देता है। 50 की उम्र के बाद घुटने अच्छे रखना है तो जमीन पर बैठने से परहेज करना चाहिए। जिन लोगों को घुटने के दर्द की शिकायत है, उन्हें वज्रासन जैसे आसनों से बचना चाहिए। देश में हर साल पौने दो लाख घुटने प्रत्यारोपित हो रहे हैं। ऐसे ही चलता रहा तो जल्द ही यह आंकड़ा दो से ढाई लाख प्रतिवर्ष तक पहुंच जाएगा।

    यह बात हड्डी रोग विशेषज्ञों की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ‘आयोकॉन-2017’ के तीसरे दिन विशेषज्ञों ने कही। कॉन्फ्रेंस का औपचारिक उद्घाटन गुरुवार को भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरसी लाहोटी ने किया। वे शुक्रवार को मुख्य वक्ता होंगे।

    ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. प्रमोद नीमा के मुताबिक गुरुवार को कॉन्फ्रेंस में सबसे ज्यादा डॉक्टरों ने शिरकत की। मेडिकल के क्षेत्र में आए नवाचारों को लेकर दिनभर सेशन हुए। विशेषज्ञों ने विकृति सुधार, प्लास्टर तकनीक, कमर के दर्द, कूल्हे और घुटने के जोड़ों में घिसाव रोकने, स्पाइन सर्जरी आदि पर चर्चा की।

    कंधा बदलने का भी प्रयास

    पुणे से आए घुटना रोग विशेषज्ञ डॉ. पराग संचेती ने बताया कि घुटने, कूल्हे के साथ अब मरीज कंधा बदलवाने के लिए भी डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। घुटने के हल्के दर्द की शुरुआत के साथ ही मरीज को हिदायत बरतना शुरू कर देना चाहिए। 50 साल की उम्र के बाद व्यक्ति को जमीन पर बैठने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि उठते वक्त घुटनों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव उन्हें कमजोर कर देता है। घुटने अच्छे रखना है तो पानी के बहाव से विपरीत चलने और साइकलिंग जैसे व्यायाम करना चाहिए। इससे घुटनों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

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